आरोपों से घिरे पांडे, मुद्दा बदलने की कोशिश?बड़े चेहरों पर हमला तेज

उत्तराखंड की राजनीति में अरविंद पांडे एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। कांग्रेस द्वारा उनके कथित पत्र को लेकर उठाए गए सवालों के बीच अब खुद उनके राजनीतिक आचरण और छवि पर भी बहस तेज हो गई है।
कई बार विधायक रहे पांडे पर समय-समय पर क्षेत्रीय स्तर पर दबंगई, जमीन विवाद,भ्रष्टाचार और जनप्रतिनिधि के तौर पर व्यवहार को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
इससे स्थानीय राजनीति में उनके खिलाफ असंतोष की चर्चा लगातार बनी रहती है, जो अब विस्फोटक स्थिति में पहुंच गई है।
*राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जब भी किसी नेता पर लगातार सवाल उठते हैं, तो अक्सर वो ध्यान भटकाने के लिए बड़े चेहरों को निशाना बनाता है*
*मुख्यमंत्री धामी की बढ़ती हुई लोकप्रियता और लगातार लिए जा रहे निर्णायक फैसलों से राज्य ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी वे एक एक मजबूत नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं*
ऐसे में पार्टी के भीतर या बाहर, कुछ नेता असहज महसूस कर रहे हैं, अरविंद पांडे के कथित पत्र को भी इसी संदर्भ में जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी के नेताओं की मानें तो *अब ये अरविंद पांडे की जिम्मेदारी बन जाती है कि वो आगे आकर उनके नाम पर कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे कथित पत्र पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें , ऐसा न होने की स्थिति में संगठन उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है।*
खैर, अब जो भी हो, अरविंद पाण्डेय का कांग्रेस में जाना तय माना जा रहा है।
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